भारतीय संस्कृति का मूल आधार उसके महान ग्रंथ, आदर्श चरित्र और समृद्ध साहित्य हैं। इन्हीं मूल्यों के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यरत रामायण रिसर्च काउंसिल साहित्य सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही है। यह संस्था केवल रामायण के अध्ययन और अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन, नैतिक मूल्यों तथा सांस्कृतिक चेतना को साहित्य के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का सतत प्रयास कर रही है।
रामायण रिसर्च काउंसिल विभिन्न साहित्यिक विधाओं—जैसे शोध आलेख, निबंध, कविता, कहानी, संस्मरण, समीक्षा तथा पुस्तक प्रकाशन—को प्रोत्साहित करती है। संस्था नवोदित एवं वरिष्ठ साहित्यकारों को समान रूप से मंच प्रदान करती है, जिससे उनकी रचनात्मक प्रतिभा को नई दिशा मिलती है। समय-समय पर आयोजित साहित्यिक गोष्ठियाँ, संगोष्ठियाँ, व्याख्यानमालाएँ और लेखन प्रतियोगिताएँ साहित्यिक वातावरण को समृद्ध बनाती हैं तथा नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करती हैं।
काउंसिल का प्रमुख उद्देश्य रामायण के आदर्शों—मर्यादा, सत्य, सेवा, करुणा, त्याग और लोकमंगल—को समकालीन साहित्य में प्रतिष्ठित करना है। संस्था मानती है कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज निर्माण और चरित्र निर्माण का प्रभावी माध्यम भी है। इसी दृष्टि से इसके द्वारा प्रकाशित साहित्य समाज में नैतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव की भावना को सुदृढ़ करता है।












रामायण रिसर्च काउंसिल भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विशेष बल देती है। हिंदी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में साहित्य सृजन को प्रोत्साहन देकर यह संस्था भाषाई विविधता और सांस्कृतिक एकात्मता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है। शोधपरक लेखन और प्रामाणिक प्रकाशनों के माध्यम से यह रामायण साहित्य के गहन अध्ययन को भी नई गति प्रदान कर रही है।
वर्तमान समय में जब वैश्वीकरण और तकनीकी परिवर्तन के कारण सांस्कृतिक मूल्यों के समक्ष अनेक चुनौतियाँ हैं, तब रामायण रिसर्च काउंसिल साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति के शाश्वत संदेश को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। यह संस्था परंपरा और आधुनिकता के मध्य एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करते हुए साहित्य को समाजोपयोगी और मूल्यपरक दिशा प्रदान कर रही है।
1) अयोध्या में श्रीराम मंदिर संघर्ष पर आधारित 1250 पृष्ठों का एक ग्रंथ ‘श्रीरामलला- मन से मंदिर तक’ हिन्दी भाषा में पूर्ण हो चुका है। काउंसिल वर्ष 2018 से इस कार्य कर रही थी। इस ग्रंथ हेतु वर्ष 2021 में काउंसिल के महासचिव श्री कुमार सुशांत को मा. प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन भी प्राप्त हो चुका है जिसके बाद यह ग्रंथ हिन्दी भाषा में पूर्ण हुआ है। अंग्रेजी भाषा में इस पर अनुवाद जारी है। इसे कई अन्य भाषाओं में अनुवाद किया जाना है।
2) माता सीताजी की आराधना एवं भक्ति पर आधारित पुस्तक ‘श्रीभगवती सीता- महाशक्ति साधना’ वर्ष 2023 में जानकी नवमी के पवित्र अवसर पर नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी है।
3) सनातन विचार को प्रसार करने वाली पुस्तक ‘सनातन संग भारत’, जिसका विमोचन बागेश्वर सरकार आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी की उपस्थिति में पद्मविभूषण जगदगुरु पूज्य स्वामी श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज, पटना (बिहार) के गांधी मैदान में 06 जुलाई 2025 को ‘सनातन महाकुंभ’ आयोजन में कर चुके हैं।
4) वर्ष 2025 में आयोजित महाकुंभ में अधिकांश प्रमुख गतिविधियों को चित्र सहित सम्मिलित कर वृहद साहित्य ‘महाकुंभ का महामंथन’ को हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा में कॉफीटेबल बुक के रूप में तैयार किया गया है।
5) वैदेहीनंदन पंडित वेदांतजी महाराज (12 वर्षीय) द्वारा बालमन को सांस्कृतिक विचारों से जोड़ने वाले पद्य ‘वेदांत पुष्प’ को तैयार किया गया है। इतनी कम आयु में ही उन्होंने सनातन दर्शन, रामायण साहित्य, संस्कृत भाषा, काव्य-लेखन तथा माता सीता के जीवन-दर्शन पर उल्लेखनीय अध्ययन एवं लेखन कार्य किया है। उनके द्वारा रचित प्रमुख पुस्तकों में- श्रीभगवती सीताजी – प्राकट्य-रहस्यम्, अवतार रहस्यः – कमला से किशोरी तक, श्रीसीतारामः विवाह-उत्सव, महाशक्ति सीताजी, मैथिली और मिथिला… विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
6) वैदेहीनंदन वेदांतजी ने ही काउंसिल के लिए संस्कृत भाषा के शिक्षण हेतु ‘आइए देवभाषा सीखें’ तथा बाल-संस्कारों के संवर्धन हेतु ‘मानस में बाल-संस्कार’ जैसी उपयोगी पुस्तकों का भी लेखन किया है। इस पुस्तक के ही आधार पर काउंसिल की एक टीम ‘रामायण मंच’ प्रकल्प के माध्यम से बच्चों को संस्कारित करती रही है।
7) लोक परंपराओं को दर्शाता पद्य ‘अवधि लोकगीतों में सीता-राम’ को जनमानस हेतु तैयार किया है।
इसके साथ ही,
8) संस्कृति एवं लोक परंपराओं पर आधारित देवभाषा संस्कृत में पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का पिछले तीन वर्षों से नियमित प्रकाशन किया जा रहा है।
Copyright © 2026 ramayanresearchcouncil.org. All Rights Reserved.