रामायण रिसर्च काउंसिल केवल एक संस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और राष्ट्रचेतना के संरक्षण एवं संवर्धन का एक समर्पित अभियान है। एक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत यह संस्था देशभर में सांस्कृतिक पुनर्जागरण, साहित्य सृजन, शोध एवं जन-जागरण के विविध आयामों पर निरंतर कार्य कर रही है।
काउंसिल ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों को समेटते हुए ‘श्रीरामलला – मन से मंदिर तक’ नामक लगभग 1250 पृष्ठों का एक वृहद ग्रंथ तैयार किया है, जो हिन्दी भाषा में पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में इस महत्वपूर्ण ग्रंथ को अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य जारी है। इस ग्रंथ के संबंध में काउंसिल के प्रतिनिधियों द्वारा दिनांक 31 अगस्त 2021 को माननीय प्रधानमंत्री जी को विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई थी।
साहित्य सृजन और भारतीय भाषाओं के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अंतर्गत काउंसिल पिछले दो वर्षों से संस्कृत भाषा में ‘रामायण वार्ता’ नामक पाक्षिक पत्रिका का सफल प्रकाशन कर रही है। साथ ही संस्कृत भाषा के शिक्षण एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए 60 दिवसीय संस्कृत अध्ययन पाठ्यक्रम विकसित करने का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा से जुड़ सके।
काउंसिल ने वर्ष 2025 के महाकुंभ पर आधारित एक विस्तृत और समृद्ध कॉफी टेबल बुक भी तैयार की है, जिसमें महाकुंभ की प्रमुख गतिविधियों, सांस्कृतिक अनुभवों और आध्यात्मिक विरासत का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया गया है।
वर्ष 2020 से काउंसिल माता सीताजी के प्राकट्य-क्षेत्र सीतामढ़ी (बिहार) को एक भव्य तीर्थ एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद द्वारा 833 वर्ष प्राचीन श्रीराम-जानकी स्थान, राघोपुर बखरी में लगभग 12 एकड़ भूमि काउंसिल को आवंटित की गई है।
काउंसिल का संकल्प इस प्राचीन मठ का पुनरुद्धार कर इसे एक दिव्य शक्ति-धाम के रूप में विकसित करना है। इसके लिए देश के 51 शक्तिपीठों से मिट्टी एवं ज्योत लाकर इस स्थल को आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक चेतना के केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना है।
प्रस्तावित परिसर में एक विशाल धनुष-स्वरूप स्मारक, 108 फीट ऊँची श्रीहनुमानजी की प्रतिमा, 21 फीट ऊँची श्रीजटायु भगवान की प्रतिमा, अध्ययन केंद्र, शोध केंद्र, डिजिटल म्यूजियम तथा अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाना प्रस्तावित है।
इस राष्ट्रीय संकल्प को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए देश के अनेक संतों और विद्वानों के सहयोग से 10 जून 2025 को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक प्रेस-वार्ता आयोजित की गई। इसके पश्चात 20 जुलाई 2025 से देशभर के सनातन परिवारों को इस अभियान से जोड़ने हेतु एक विशेष आमंत्रण-अभियान का शुभारंभ किया गया, जिसका प्रथम आमंत्रण नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी, काल भैरव एवं दक्षिणमुखी हनुमानजी को समर्पित किया गया।
यह केवल मंदिर निर्माण का संकल्प नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था, साहित्य, शोध और सनातन मूल्यों के संरक्षण का एक महायज्ञ है। हम सभी को इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अभियान में अपनी श्रद्धा, सहभागिता और सामर्थ्य के अनुसार योगदान देना चाहिए।
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